HOLI


फागुन आया उड़ रहा
अबीर और गुलाल
होली में सब मस्त हुए
किसका पूछे हाल
बसंती रंगो में डूबे
खिला हास परिहास
फागुन में मदमस्त हुए सब
छाया उल्लास

सरसों फूली टेसू महका
खिला हरसिंगार
पीली चुनर
ओढ़करप्रकृति ने किया श्रृंगार .

Comments

Mithilesh dubey said…
बहुत खूब ।
होली के खूब रंग बिखेरे आपने इस रचना में बहुत खूब शुक्रिया
प्रशंसनीय - होली मिलन की हार्दिक शुभकामनाएं
सरसों फूली टेसू महका
खिला हरसिंगार
पीली चुनर
ओढ़करप्रकृति ने किया श्रृंगार ..

प्राकृति के साथ साथ आपने भी सुंदर रंगों से सजाया है अपना ब्लॉग ... होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएँ ........
Udan Tashtari said…
बेहतरीन!१

होली मुबारक!!
Ravi Rajbhar said…
Wah..ji wah..
bahut sunder ...holi ki hardik bahdai..
sangeeta swarup said…
खूबसूरत रंग बिखेरे हैं होली के... प्राकृतिक सौंदर्य का सुन्दर वर्णन ...

होली की शुभकामनायें
sabse hoil ki shubhkaamnayein aapko aur aapki family members ko
waise kafi behtareen andaaz har word ko piroyaa hai holi rupi festiwal .... bahut umda
khair ummeed karte hai jab bhi aapko waqt milega aap hamare blogs ka zarur darshan karogi aur aap apni bahumulya tipanniyo se do chaar karengi
is link par click karke hamare blogs ko dekh sakti hai

http://aleemazmi.blogspot.com/
अच्छा लिखा है , पीली चुनर
ओढ़करप्रकृति ने किया श्रृंगार ....
kshama said…
खुले हाथ...बनाते गेहूं का खेत !


भीची मुट्ठी...करती सपने रेत !


रेत...काली सफ़ेद.

Yahi qudrat ke rang aapke jeevan me bhi bikharen!
खूबसूरत रंग बिखेरे हैं होली के... प्राकृतिक सौंदर्य का सुन्दर वर्णन ...
सुन्दरम सुन्दरम सुन्दरम
सुन्दरम सुन्दरम सुन्दरम

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